Lokrang Mahotsav 2025: अतुल्य भारत (Incredible India) की सांस्कृतिक छटा बिखेरता, जयपुर का 28वां लोकरंग महोत्सव (28th Lokrang Mahotsav 2025) अपने पूरे शबाब पर है। जयपुर के जवाहर कला केंद्र में लोक कलाओं का यह महाकुंभ धीरे-धीरे परवान चढ़ रहा है। कला प्रेमी रोज़ाना नई लोक विधाओं से रूबरू हो रहे हैं और लोक संस्कृति का यह रंग उन्हें खूब रास आ रहा है। करवा चौथ के विशेष अवसर पर भी बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे, जहां शिल्पग्राम में भी महिलाओं ने खरीदारी का आनंद लिया। यह महोत्सव 17 अक्टूबर तक यूं ही लोक संस्कृति की महक फैलाता रहेगा।
करवा चौथ पर दिखा खास उत्साह
शुक्रवार को करवा चौथ के विशेष अवसर पर भी बड़ी संख्या में दर्शक कलाकारों के हुनर की झलक देखने पहुंचे। मध्यवर्ती और शिल्पग्राम का मंच लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों से जीवंत हो उठा। इस दौरान शिल्पग्राम में राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले के तहत महिलाओं ने खरीददारी का भी आनंद लिया।
मांगणियार गायकों ने जमाई महफिल
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत मध्यवर्ती में राजस्थानी मांगणियार गायकों के सधे स्वरों के साथ हुई। उस्ताद शाकर सद्दीक खां मांगणियार व समूह ने ढोलक, करताल, भपंग, सिंधी सारंगी और हारमोनियम की धुन पर अपनी आवाज का जादू दिखाया। उन्होंने ‘झिरमिर बरसे मेह’ में वर्षा ऋतु का सौंदर्य दर्शाया, वहीं ‘हिचकी’ गीत में विरह वेदना को झलकाया।

राष्ट्रीय नृत्यों की रंगारंग प्रस्तुति
इसके बाद मंच पर राष्ट्रीय लोक नृत्यों की शृंखला शुरू हुई। हिमाचल प्रदेश से आए कलाकारों ने सिरमौर जिले के पारंपरिक ‘रिहालटी-गी’ नृत्य में पहाड़ी संस्कृति का सुंदर परिचय कराया। उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने ‘ढेड़िया’ नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें ग्रामीण जीवन के उल्लास और परंपरा की झलक देखने को मिली।
हरियाणा के ‘फाग’ में झलका हास्य और श्रृंगार
राजस्थानी लोक कलाओं में पारसमल समूह ने ‘आंगी गैर’ की ऊर्जा भरी प्रस्तुति दी। वहीं, हरियाणा से आए कलाकारों ने ‘फाग’ लोक नृत्य प्रस्तुत किया, जो फाल्गुन महीने और होली के उत्सव का प्रतीक है। ढोलक, मंजीरा और नगाड़े की थाप पर पुरुषों और महिलाओं द्वारा किए गए इस नृत्य में हास्य, प्रेम और श्रृंगार के रंग स्पष्ट रूप से झलकते दिखे।
जनजातीय कलाओं का प्रदर्शन
राजस्थान के मावा राम समूह ने ‘गरासिया’ जनजातीय नृत्य में पारंपरिक जीवनशैली, रीति-रिवाज और सामाजिक मान्यताओं की छवि प्रस्तुत की। मध्यप्रदेश के गोंड जनजातीय कलाकारों ने हाथों में लकड़ी की लाठियाँ और रुमाल लेकर सामूहिक उत्साह के साथ ‘रीना-सैला’ लोकनृत्य पेश किया।
पंजाब के ‘जिंदवा’ से हुआ समापन
नारायण डामोर व समूह ने ‘डांगड़ी डोला’ नृत्य की मनभावन प्रस्तुति दी, जिसके ऊर्जा-भरे कदमों ने मंच पर रंग भर दिए। ओडिशा से आए कलाकारों ने ‘डाल खाई’ नृत्य के माध्यम से अपने राज्य की सांस्कृतिक विविधता दिखाई। कार्यक्रम का समापन पंजाब के कलाकारों ने ‘जिंदवा’ नृत्य से किया, जिसकी तेज लय और उत्सवधर्मिता ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। देर शाम तक केंद्र परिसर लोक धुनों, तालों और रंगों से गूंजता रहा।
जवाहर कला केंद्र में लोकरंग महोत्सव की अद्भुत झलकियाँ! हिमाचल, हरियाणा और मध्य प्रदेश की लोक कलाओं ने कैसे मंच पर रंग बिखेरे, देखिए इस वीडियो में…
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