Pandit Ram Narayan Azad: किसी भी समाज की जीवंतता इस बात से मापी जाती है कि वह अपने पूर्वजों और बलिदानियों को किस रूप में याद रखता है। फर्रुखाबाद की मिट्टी ने न केवल साहित्य और कला को सींचा है, बल्कि राष्ट्र की वेदी पर अपने ‘लाल’ भी न्यौछावर किए हैं। शहीद पंडित रामनारायण आज़ाद (Shaheed Pandit Ram Narayan Azad) एक ऐसा ही नाम है, जो कालक्रम के धुंधलके में कहीं ओझल हो गया था, लेकिन भूपेंद्र प्रताप सिंह की किताब ‘अग्नि गाथा के नायक: शहीद रामनारायण आज़ाद’ (Agni Gatha Ke Nayak – Shaheed Ramnarayan Azad) ने उन्हें पुनः जनमानस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
फर्रुखाबाद की मिट्टी के लाल और महान क्रांतिकारी शहीद रामनारायण आज़ाद की वीरता अब घर-घर पहुँचने को तैयार है। लेखक भूपेंद्र प्रताप सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘अग्नि गाथा के नायक: शहीद रामनारायण आज़ाद’ ने आधिकारिक विमोचन से पहले ही जिले में हलचल मचा दी है। अपनी जड़ों और इतिहास के प्रति जागरूक फर्रुखाबाद वासियों के बीच इस पुस्तक को ऑनलाइन मंगवाने की जबरदस्त होड़ देखी जा रही है।
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स में इस पुस्तक की कवर फोटो और शहीद रामनारायण आज़ाद के बलिदान की चर्चाएं तेज हैं। फर्रुखाबाद के लोग अपने जिले के इस विस्मृत नायक के बारे में जानने के लिए इतने उत्सुक हैं कि विमोचन का इंतजार किए बिना ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर बुक किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहीद रामनारायण आज़ाद फर्रुखाबाद की अस्मिता का प्रतीक हैं। लेखक भूपेंद्र प्रताप सिंह ने इस पुस्तक में न केवल शहीद आज़ाद की जीवनी लिखी है, बल्कि फर्रुखाबाद के उन ऐतिहासिक संदर्भों को भी समेटा है जिनसे आज की पीढ़ी अनजान थी। यह पुस्तक जिले के गौरवशाली क्रांतिकारी अतीत का एक प्रामाणिक दस्तावेज़ मानी जा रही है।
लेखक भूपेंद्र प्रताप सिंह के शोध और इस अनूठे विषय के चयन की सराहना हर तरफ हो रही है। जानकारों का मानना है कि लंबे समय बाद फर्रुखाबाद के किसी स्थानीय नायक पर इतनी शोधपरक पुस्तक सामने आई है। पुस्तक के प्रति यह ‘क्रेज’ दर्शाता है कि लोग अपने इतिहास और वीर पुरुषों को सम्मान देने के लिए कितने लालायित हैं।
सबसे खास बात यह है कि पुस्तक को लेकर युवाओं में सबसे ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रेटिंग और मांग को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि विमोचन के समय तक यह पुस्तक ‘बेस्ट सेलर’ की सूची में शामिल हो सकती है। फर्रुखाबाद के प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि यह केवल एक पुस्तक की बिक्री नहीं है, बल्कि अपनी मिट्टी के शहीद के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक माध्यम है।
