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Whispers Of The Mountains राजस्थानी फ़ीचर फ़िल्म की 56वें IFFI2025 में विशेष स्क्रीनिंग

IFFI 2025: Whispers Of The Mountains पत्थरों के बीच उम्मीद के पेड़, IFFI 2025 में दिखी राजस्थान की मार्मिक गाथा

राजस्थानी फ़ीचर फ़िल्म ‘व्हिस्पर्स ऑफ द माउंटेंस’ में आर्थिक विकास और पर्यावरण संघर्ष की कहानी
आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच नाजुक संतुलन को दर्शाती है यह फिल्म
फ़िल्म के निर्देशक जिगर नागदा और निर्माता जितेंद्र मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म पर की चर्चा

गोवा में चल रहे 56वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव (IFFI) 2025 में, राजस्थानी फ़ीचर फ़िल्म ‘व्हिस्पर्स ऑफ द माउंटेंस’ (Whispers Of The Mountains) ने खनन से जुडे समस्याओ का मानवीय चित्रण कर दर्शको के दिल मे एक विशेष जगह बनाई। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए फिल्म के निर्देशक जिगर नागदा (Jigar Nagda) ने कहा,

“यह फ़िल्म मेरे पैतृक उदयपुर और आसपास के क्षेत्र से प्रेरित है। मेरी डॉक्यूमेंट्री ‘अरावली: द लॉस्ट माउंटेंस’ के बाद, मुझे लगा कि इस विषय पर एक फ़ीचर फ़िल्म बनाना ज़रूरी है। ‘व्हिस्पर्स ऑफ द माउंटेंस’ एक पिता-पुत्र के संबंध के माध्यम से यह दिखाती है कि कैसे हम आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के चलते अपने पर्यावरण को अनजाने में नष्ट कर रहे हैं। रघु का पहाड़ों के प्रति मौन प्रेम एक उम्मीद की किरण है।”

फिल्म के निर्माता जितेंद्र मिश्रा (Jitendra Mishra) ने कहा,

“यह एक ऐसी कहानी है जो सीमाओं से परे है। पर्यावरण की रक्षा और सतत् विकास आज की सबसे बड़ी ज़रूरतें हैं। जिगर की इस कहानी में बहुत ईमानदारी और भावनात्मक गहराई है। मेरा उद्देश्य हमेशा ऐसी कहानियों को समर्थन देना रहा है जो सामाजिक प्रभाव डालती हों, और ‘व्हिस्पर्स ऑफ द माउंटेंस’ बिल्कुल वैसी ही फ़िल्म है,”

अरावली की पृष्ठभूमि पर एक भावनात्मक कहानी

यह फ़िल्म राजस्थान के अरावली क्षेत्र की पृष्ठभूमि पर आधारित है और एक 40 वर्षीय चाय स्टॉल मालिक तिलक और उसके 12 वर्षीय बेटे रघु के भावनात्मक टकराव को दर्शाती है। फ़िल्म आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक नाज़ुक संतुलन को उजागर करती है। पत्नी को खोने के बाद, तिलक आर्थिक लाभ के लिए खनन का समर्थन करता है। वहीं, मूक और संवेदनशील रघु पहाड़ों से गहरा जुड़ाव रखता है और प्रकृति के विनाश पर दुखी होता है। जब तिलक को सिलिकोसिस नामक बीमारी का पता चलता है, तो रघु ही परिवार का एकमात्र सहारा बन जाता है। बेहतर जीवन की इच्छा के बावजूद, रघु अपने कर्तव्यों को निभाता है, लेकिन पहाड़ों के प्रति उसका प्रेम उसे मौन विद्रोह की ओर ले जाता है, जहाँ वह विनाश के निशानों को भरने के लिए पेड़ लगाता है।

‘द लास्ट कलर’ और ‘आई एम कलाम’ के बाद जितेंद्र का नया प्रयास

फिल्म के निर्माता जितेंद्र इससे पहले ‘आई एम कलाम’ और ‘द लास्ट कलर’ जैसी समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फ़िल्में बनाई हैं। उन्होंने फ़िल्म के संदेश को वैश्विक स्तर पर ले जाने के महत्व पर चर्चा भी की।

फ़िल्म निर्देशक जिगर ने अनुराग कश्यप के साथ किया है काम

फ़िल्म के निर्देशक जिगर नागदा ने मुंबई विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर किया है और अनुराग कश्यप व ओनिर जैसे निर्देशकों के साथ काम किया है। जिगर नागदा ने फ़िल्म के विषय पर जोर दिया। उनका मानना है कि सिनेमा में पर्यावरण से संबंधित कहानियाँ सुनाना महत्वपूर्ण है।

सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ ‘व्हिस्पर्स ऑफ द माउंटेंस’ की IFFI में स्क्रीनिंग

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में ‘व्हिस्पर्स ऑफ द माउंटेंस’ की विशेष स्क्रीनिंग आज 25 नवंबर 2025 को INOX स्क्रीन – II, पोरवोरिम में आयोजित की गई। इस फ़िल्म को दर्शकों और आलोचकों से समान रूप से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। यह स्क्रीनिंग IFFI 2025 के कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी, जिसने भारतीय सिनेमा की विविध और समृद्ध सामग्री को प्रदर्शित किया।

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