भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में बताया कि ‘छठ महापर्व’ को यूनेस्को (UNESCO) की ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ की प्रतिनिधि सूची में शामिल करने के लिए नामांकन भेज दिया गया है।
उन्होंने बताया कि संगीत नाटक अकादमी द्वारा क्षेत्रीय निकायों और हितधारकों के सहयोग से छठ पूजा का नामांकन दस्तावेज़ तैयार किया गया है। इसे 2026-27 चक्र के लिए यूनेस्को को प्रस्तुत किया गया है। यह कदम बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड समेत पूरे देश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मान्यता दिलाने की दिशा में बड़ा प्रयास है।
गुरु-शिष्य परंपरा को प्रोत्साहन
दुर्लभ और लुप्तप्राय कला रूपों को बचाने के लिए संस्कृति मंत्रालय के क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों के माध्यम से ‘गुरु-शिष्य परंपरा योजना’ चलाई जा रही है। इस योजना के तहत गुरु को ₹7,500 प्रति माह, संगतकार को ₹3,750 प्रति माह। शिष्यों को ₹1,500 प्रति माह का मानदेय दिया जाता है। यह प्रशिक्षण न्यूनतम छह माह से एक वर्ष तक चलता है, जिससे ज्ञान का हस्तांतरण अगली पीढ़ी तक सुनिश्चित हो सके।
युवाओं की भागीदारी पर ज़ोर
सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना है। इसके लिए राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव (RSM), अंतर-राज्यीय विनिमय कार्यक्रम और शिल्प प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को लोक नृत्य, संगीत और पारंपरिक शिल्प का व्यावहारिक कौशल प्रदान किया जा रहा है, जो संकटग्रस्त कला रूपों के पुनर्जीवन में प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं।
