FARRUKHABAD: कायमगंज (Kaimganj) के गाँव कुबेरपुर में हज़रत फ़तेह मुहम्मद ख़ान उर्फ़ डब्बा शाह मियां रहमतुल्लाह अलैह के मज़ार-ए-अक़दस पर आयोजित सालाना उर्स-ए-पाक इस बार भी पूरी शान-ओ-शौक़त और रूहानियत के साथ संपन्न हुआ। तीन दिनों तक चले इस उर्स में देश के विभिन्न हिस्सों से आए हज़ारों ज़ाएरीन ने शिरकत कर मज़ार पर हाजिरी दी और अपनी मुरादें माँगीं। यह आयोजन 17 अक्टूबर को ‘क़ुल शरीफ़’ की मुक़द्दस रस्म के साथ संपन्न हुआ।
उर्स का सबसे बड़ा आकर्षण पारंपरिक ‘महफ़िल-ए-कव्वाली’ रही, जिसमें देश के जाने-माने कव्वाल अजमेरी ब्रदर्स (फैज़ान अजमेरी और फ़राज़ अजमेरी) की जोड़ी ने अपनी शानदार प्रस्तुति से समां बांध दिया। उनके गाए सूफ़ियाना कलामों और ग़ज़लों पर श्रोता भाव-विभोर हो उठे।
कव्वालों की रूहानी आवाज़ और कलाम से मुतास्सिर होकर अकीदतमंदों ने खुशी में ‘नज़राना-ए-अक़ीदत’ के तौर पर नोटों की जमकर बरसात की। कव्वाली का यह दौर सुबह की अज़ान तक अनवरत जारी रहा। इस महफ़िल में अजमेरी ब्रदर्स के अलावा शबनम वारसी और शमशाबाद के मतलूब मंसूर नियाज़ी ने भी अपनी दिलकश सूफ़ी मौसीक़ी से हाज़िरीन का दिल जीत लिया।
इस आयोजन को सफल बनाने में क्षेत्र के कई गणमान्य लोगों और प्रबंधकों का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर सीनियर कांग्रेस लीडर आफ़ताब ख़ान, यूथ कांग्रेस लीडर व ज़िला पंचायत उम्मीदवार जुनैद मम्मा, लईक ख़ान, समी ख़ान, रहबर ख़ान और आज़म खां ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं, उर्स की व्यवस्था और हुस्न-ए-इंतज़ाम को सुचारू रूप से चलाने में यासीन ख़ाँ, गुड्डू ख़ाँ, नज़म ख़ाँ, अली यासर ख़ाँ, बाबू ख़ाँ, माबूद ख़ाँ, चमन खां और जावेद खां समेत तमाम ज़िम्मेदार लोगों ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
